Wednesday, May 25, 2022
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के सबसे बुरे प्रभावों में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण पिघल रही बर्फ से दुनिया के समुद्री सतह का बढ़ता जलस्तर (Rising Sea Level) है. इन जलस्तरों में हो रहे बदलावों को जानने के लिए नासा और फ्रांस की स्पेस एजेंसी CNES मिलकर अगले साल एक अभियान के साथ सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा जो वहां से महासागरों और पृथ्वी के अन्य स्रोतों पर निगरानी रखते हुए उनमें हो रहे बदलाव के आंकड़ें जुटाएगा जो वैज्ञानिकों को मदद जलवायि परिवर्तन और अन्य अध्ययनों में सहायता करेगा.

  • by News18Hindi

 जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर होने वाले अध्ययनों में सौटेलाइट (Satellite) से किए अवलोकनों की भी बड़ी भूमिका है. चाहे अंटार्कटिका या आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत का छेद हो या बर्फ पिघलने का प्रभाव, या फिर दुनिया में कम होते जंगलों के क्षेत्रफल की जानकारी हो. सैटेलाइट अवलोकनों से ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराई हैं जो किसी दूसरे साधन से मिलना असंभव ही है. अब सैटेलाइट एक और तरह के अवलोकन में हमारी मदद करेंगे. जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे समुद्र की सतह के जलस्तर (Rising Sea Levels) पर नजर रखने का काम नासा (NASA) और फ्रांस की स्पेस एजेंसी का संयुक्त अभियान करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर होने वाले अध्ययनों में सौटेलाइट (Satellite) से किए अवलोकनों की भी बड़ी भूमिका है. चाहे अंटार्कटिका या आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत का छेद हो या बर्फ पिघलने का प्रभाव, या फिर दुनिया में कम होते जंगलों के क्षेत्रफल की जानकारी हो. सैटेलाइट अवलोकनों से ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराई हैं जो किसी दूसरे साधन से मिलना असंभव ही है. अब सैटेलाइट एक और तरह के अवलोकन में हमारी मदद करेंगे. जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे समुद्र की सतह के जलस्तर (Rising Sea Levels) पर नजर रखने का काम नासा (NASA) और फ्रांस की स्पेस एजेंसी का संयुक्त अभियान करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

 शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह अभियान पृथ्वी (Earth) के झील, नदियों जैसे पानी के स्रोतों और भंडारों में बहने वाले पानी की मात्रा के साथ समुद्र तल (Sea Level) के स्थानीय बदलावों का पता लगाने में मदद करेगा. सैटेलाइट को पूरी तरह से असेंबल करने के बाद इंजीनियर इस अभियान का विभिन्न हालात में परीक्षण शुरू कर देंगें. नासा (NASA) का कहना है कि अगले छह महीनों में परीक्षण के तीन दौर होंगे जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सैटेलाइट अंतरिक्ष के कठोर वातावरण में काम कर सकेगा. परीक्षण के दौर में सैटेलाइट को बहुत से कंपन और आवाजों से गुजारा जाएगा जिसका सामना उसे प्रक्षेपण के दौरान करना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह अभियान पृथ्वी (Earth) के झील, नदियों जैसे पानी के स्रोतों और भंडारों में बहने वाले पानी की मात्रा के साथ समुद्र तल (Sea Level) के स्थानीय बदलावों का पता लगाने में मदद करेगा. सैटेलाइट को पूरी तरह से असेंबल करने के बाद इंजीनियर इस अभियान का विभिन्न हालात में परीक्षण शुरू कर देंगें. नासा (NASA) का कहना है कि अगले छह महीनों में परीक्षण के तीन दौर होंगे जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सैटेलाइट अंतरिक्ष के कठोर वातावरण में काम कर सकेगा. परीक्षण के दौर में सैटेलाइट को बहुत से कंपन और आवाजों से गुजारा जाएगा जिसका सामना उसे प्रक्षेपण के दौरान करना होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

 जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण दुनिया भर के बहुत सारे शहरों के डूबने का खतरा मंडराने लगा है. नासा और फ्रांस की स्पेस एजेंसी सेंटर नेशनल डी इट्यूड्स स्पैटिएल्स (CNES) अपने नए संयुक्त अभियान में पृथ्वी की सतह का वैश्विक सर्वे के साथ ही महासागरों की धाराओं का भी अध्ययन करेंगे. साल 2022 में प्रक्षेपित होने वाले इस अभियान का नाम सरफेस वाटर एंड ओशीन टोपोग्राफी (SWOT) अभियान है. यह अभियान अंतरिक्ष की ऊंचाई से पृथ्वी के नमकीन और साफ पानी जैसे महासागर, नदियां, झीलों आदि के आंकड़े जमा करेगा जिसका उपयोग शोधकर्ता पूरी दुनिया में पानी की मात्रा और स्थिति जानने के लिए करेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण दुनिया भर के बहुत सारे शहरों के डूबने का खतरा मंडराने लगा है. नासा और फ्रांस की स्पेस एजेंसी सेंटर नेशनल डी इट्यूड्स स्पैटिएल्स (CNES) अपने नए संयुक्त अभियान में पृथ्वी की सतह का वैश्विक सर्वे के साथ ही महासागरों की धाराओं का भी अध्ययन करेंगे. साल 2022 में प्रक्षेपित होने वाले इस अभियान का नाम सरफेस वाटर एंड ओशीन टोपोग्राफी (SWOT) अभियान है. यह अभियान अंतरिक्ष की ऊंचाई से पृथ्वी के नमकीन और साफ पानी जैसे महासागर, नदियां, झीलों आदि के आंकड़े जमा करेगा जिसका उपयोग शोधकर्ता पूरी दुनिया में पानी की मात्रा और स्थिति जानने के लिए करेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

 SWOT कार्यक्रम की वैज्ञानिक नादिया विनोग्रादोवा शिफर ने बताया, “SWOT पृथ्वी (Earth) के सतह के पानी की पहले वैश्विक तस्वीर होगा. इसमें पानी कैसे पूरे ग्रह में गतिविधि करता है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change)पर उसका क्या असर होता है. यह अभियान स्पेस एजेंसी को पृथ्वी के पानी पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के मापन में सहायता करेगा. इसमें वे प्रक्रियाएं भी शामिल होंगी जिससे महासागरों की धाराएं (Ocean Currents) वायुमंडल से ऊष्मा, नमी और CO2 जैसी ग्रीन हाउस गैसें अवशोषित करती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

SWOT कार्यक्रम की वैज्ञानिक नादिया विनोग्रादोवा शिफर ने बताया, “SWOT पृथ्वी (Earth) के सतह के पानी की पहले वैश्विक तस्वीर होगा. इसमें पानी कैसे पूरे ग्रह में गतिविधि करता है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change)पर उसका क्या असर होता है. यह अभियान स्पेस एजेंसी को पृथ्वी के पानी पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के मापन में सहायता करेगा. इसमें वे प्रक्रियाएं भी शामिल होंगी जिससे महासागरों की धाराएं (Ocean Currents) वायुमंडल से ऊष्मा, नमी और CO2 जैसी ग्रीन हाउस गैसें अवशोषित करती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

 इस अभियान के लिए जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तैयार करे के साथ वैज्ञानिकों की टीम पहले ही डेटा टूल्स पर काम कर रही है जिससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से संबंधित सूचनाएं निकाली जा सकें. शोधकर्ताओं सिम्यूलेशन (Simulations) के आंकड़ों का उपयोग किया और जरूरी हिस्सों की जांच और पड़ताल की. शोधकर्ताओं ने परीक्षण के दौरान सैटेलाइट (Satellite) के मापन की तुलना जमीन से जुटाए गए आंकड़ों से की जिससे वे यह पता कर कर सकें वे प्रक्षेपण के बाद मिलने वाले आंकड़ों को सही तरह से कैसे पढ़ेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

इस अभियान के लिए जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तैयार करे के साथ वैज्ञानिकों की टीम पहले ही डेटा टूल्स पर काम कर रही है जिससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से संबंधित सूचनाएं निकाली जा सकें. शोधकर्ताओं सिम्यूलेशन (Simulations) के आंकड़ों का उपयोग किया और जरूरी हिस्सों की जांच और पड़ताल की. शोधकर्ताओं ने परीक्षण के दौरान सैटेलाइट (Satellite) के मापन की तुलना जमीन से जुटाए गए आंकड़ों से की जिससे वे यह पता कर कर सकें वे प्रक्षेपण के बाद मिलने वाले आंकड़ों को सही तरह से कैसे पढ़ेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

 पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है. लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इसमें बदलाव ला रहा है. जलावायु परिवर्तन से पृथ्वी की भूआकृतियों तक में बदलाव हो रहे हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम यह जान लें कि पृथ्वी के महासागरों , झीलों और नदियों में कितना पानी है और उनमें क्या क्या बदलाव हो रहे हैं. और जलवायु परिवर्तन के कारण इन पानी के गुणों जैसे तापमान , CO2 या ऑक्सीजन जैसे गैसें सहेजने की क्षमताओं में कितना बदलाव हो रहा है यह भी जानना जरूरी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से एक है. लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इसमें बदलाव ला रहा है. जलावायु परिवर्तन से पृथ्वी की भूआकृतियों तक में बदलाव हो रहे हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम यह जान लें कि पृथ्वी के महासागरों , झीलों और नदियों में कितना पानी है और उनमें क्या क्या बदलाव हो रहे हैं. और जलवायु परिवर्तन के कारण इन पानी के गुणों जैसे तापमान , CO2 या ऑक्सीजन जैसे गैसें सहेजने की क्षमताओं में कितना बदलाव हो रहा है यह भी जानना जरूरी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

 इस अभियान के आंकड़े बाढ़ के मैदानों, दलदल के इलाकों, ताजे पानी की बहावों के स्वरूपों में आदि में बदलाव जानने में मदद करेंगे. इनसे समुद्र की सतह के स्तरों (Sea levels) में स्थानीय बदलाव भी समझने में सहायता मिलेगी. इसके अलावा समुद्री लहरों, धाराओं , तूफानों के निर्माण और दिशाओं , नदियों से समुद्रों की ओर अवसाद प्रवाह, पानी की गुणवत्ता जैसी छोटी छोटी बातें भी पता चल सकेंगी. SWOT से मिली जानकारी पहली बार वैश्विक स्तर पर प्रमाण देंगी कि कैसे धाराएं, महासागरों में ऊर्जा और ऊष्मा जैसे बदलावों सहित महासागरीय वातवरण में कार्बन गतिविधियां (Marien Environment) आदि होती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इस अभियान के आंकड़े बाढ़ के मैदानों, दलदल के इलाकों, ताजे पानी की बहावों के स्वरूपों में आदि में बदलाव जानने में मदद करेंगे. इनसे समुद्र की सतह के स्तरों (Sea levels) में स्थानीय बदलाव भी समझने में सहायता मिलेगी. इसके अलावा समुद्री लहरों, धाराओं , तूफानों के निर्माण और दिशाओं , नदियों से समुद्रों की ओर अवसाद प्रवाह, पानी की गुणवत्ता जैसी छोटी छोटी बातें भी पता चल सकेंगी. SWOT से मिली जानकारी पहली बार वैश्विक स्तर पर प्रमाण देंगी कि कैसे धाराएं, महासागरों में ऊर्जा और ऊष्मा जैसे बदलावों सहित महासागरीय वातवरण में कार्बन गतिविधियां (Marien Environment) आदि होती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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