Wednesday, May 25, 2022
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सुप्रीम कोर्ट में NEET PG मामले पर सुनवाई हुई.

सुप्रीम कोर्ट में NEET PG मामले पर सुनवाई हुई.

NEET-PG Admissions: इन मामलों में कोर्ट पीजी मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए 8 लाख रुपये की सीमा के पहलू की भी खास जांच कर रहा है. मामले में 25 अक्टूबर को हुई सुनावाई के दौरान केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि कोर्ट का फैसला आने तक पीजी मेडिकल कोर्सेज के लिे काउंसलिंग शुरू नहीं होंगी. इसके बाद 25 नवंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे EWS आरक्षण के मापदंडों की दोबारा समीक्षा का प्रस्ताव रख रहे हैं, जिसपर एक समिति भी गठित की गई.

by New18Hindi

नई दिल्ली. NEET-PG में दाखिले में ओबीसी और EWS कोटा के तहत मिले आरक्षण को चुनौती देती याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगा. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच इस मामले में फैसला सुनाएगी. याचिकाओं में मेडिकल काउंसलिंग समिति के 29 जुलाई 2021 के नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें NEET-PG (ऑल इंडिया कोटा) में ओबीसी को 27 फीसदी और EWS को 10 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी.

दो जजों की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि उनका आदेश ‘राष्ट्रीय हित’ में होगा और इसी के चलते नीट काउंसलिंग को जल्दी शुरू होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में जारी मामलों के चलते NEET-PG कोर्सेज में अभी तक काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘हम इसपर दो दिनों से सुनवाई कर रहे हैं, हमें राष्ट्रीय हित में चर्चा शुरू करनी चाहिए.’

इन मामलों में कोर्ट पीजी मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए 8 लाख रुपये की सीमा के पहलू की भी खास जांच कर रहा है. मामले में 25 अक्टूबर को हुई सुनावाई के दौरान केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि कोर्ट का फैसला आने तक पीजी मेडिकल कोर्सेज के लिए काउंसलिंग शुरू नहीं होंगी. इसके बाद 25 नवंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे EWS आरक्षण के मापदंडों की दोबारा समीक्षा का प्रस्ताव रख रहे हैं, जिसपर एक समिति भी गठित की गई.

कोर्ट ने गुरुवार को सरकार के 17 जनवरी 2019 को दिए मेमोरेंडम पर भी सवाल उठाए, जिसमें 8 लाख रुपये की सीमा की बात कही गई थी. कोर्ट ने कहा कि संविधान में 103वें संशोधन के कुछ दिन बाद ही यह आदेश आ गया था. 103वें संशोधन में EWS कोटा को शामिल किया गया था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘103वां संशोधन 14 जनवरी 2019 को आया और 17 जनवरी 2019 को यह अधिसूचना आ गई. इतने कम दिनों में सामाजिक न्याय मंत्रालय के साथ परामर्श पूरा हो गया?’PROMOTED CONTENTBy 

भाषा के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आठ लाख रुपये सालाना आय के मानदंड को सही ठहराते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उचित विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया था. उन्होंने दलील दी कि किसी परीक्षा में एक उम्मीदवार का प्रदर्शन आरक्षण पर निर्भर नहीं करता है और छात्र को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है

कुछ उम्मीदवारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत इस साल नीट-एआईक्यू में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की अनुमति देना चाहती है तो यह मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एस आर सिन्हा द्वारा अनुशंसित 2.5 लाख रुपये वार्षिक आय मानदंड पर आधारित होना चाहिए, ना कि केंद्र द्वारा निर्धारित आठ लाख रुपये की सकल वार्षिक आय सीमा होनी चाहिए.

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